मालवी दिवस मनाओ

 मालवी दिवस मनाओ 

मालवी दिवस विगत दस वर्षो से हिन्दु नव संवत्सर के आरम्भ में गुड़ी पड़वा को मनाया जाता आ रहा है पुरे मालवा के दो करोड़ लोग मालवी दिवस को धूम धाम से मानते आ रहे है।  चूकि विक्रम संवत की गणना मालवा में ही शुरू हुई है इस लिए इस दिन को मालवी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी की जड़ भी मालवा की मीठी “मालवी” भाषा और बोली हे जो मालवा के करीब २ करोड़ लोगो द्वारा लिखी और बोली जाती हे | मालवा देश का मध्य प्रभाग होकर हिंदी को उन्नत और सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका में रहा हे | मालवी बोली मालवा का लोक जीवन हे
और यहाँ के लोग इस भाषा बोली में जीते हे और घर घर में मालवी में बातचीत होती हे | मातृभाषा वह भाषा /बोली होती हे जो माँ की गोद में माँ के द्वारा सिखाई जाती हे और ये शास्वत सत्य हे की मातृभाषा ही आदमी को अपनी मातृभूमि और माँ से जोड़ती हे और भाषा ही होती हे जो लोगो को लोगो से जोड़ती हे लोगो से समाज और समाज से गाव और गाव से शहर और शहर से प्रदेश और देश को जोड़ती हे लेकिन यदि भाषा का सम्मान नहीं किया जाता तो भाषा की दीवार भी खड़ी हो जाती हे इस दीवार के कारण ही तो किसान आन्दोलन ,माओवाद,नक्सलवाद और अनेक चीजे होती जो अपनी बात ठीक से नहीं कह पाते हे और उनका अंतर द्वन्द किसी और रूप में सामने आता हे | मालवा में पिछले कुछ सालो में गाव और शहर में भाषा का बड़ा फरक आया हे जिससे गाव शहरो से दूर हो रहे हे अधिकारी ग्रामीणों को हिन नजरो से देखते हे और ग्रामीण लोग अपनी बात कहने में भी सकुचाते हे | मालवी को शहर वालो को सम्मान देना ही होगा ताकि मालवा के भोले भाले लोग अपनी बात खुल कर कर सके | सारे मालवा के लोग अपनी भाषा बोली को महत्व देते हुवे इस मालवी दिवस पर ये संकल्प ले की हम मालवी में ही बोलेंगे ,लिखेंगे और अपनी संस्कृति को संभाल करेंगे।  इस अवसर पर  सामूहिक रूप से संकल्प भी लिया जाएगा।

राजेश भंडारी "बाबू"
१०४ महावीर नगर
इंदौर
९००९५०२७३४

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