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गुड़ी पड़वा मालवी दिवस पर विशेष

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          गुड़ी पड़वा मालवी दिवस पर विशेष सुत्ती क्यों खप्पर वाली यो कैसो  है तंत्र ,का है लोकतंत्र , हावी है राजतन्त्र ,भ्रष्टाचार है मंत्र , उठ जा चमन की माली , सुत्ती क्यों खप्पर वाली | आतंकी होण ने हमारी अस्मिता पे वार कार्यो , कत्ले आम कार्यो ,पंडित होण के बेघर बार कार्यो , हिन्दू होण  से काश्मीर कराइ दियो खाली , सुत्ती क्यों खप्पर वाली | गद्दार देश का जो मन आवे करी  डाले उनका पाछे है देश का दुश्मन और उनकी चाले , काटो मुंडी इनकी और लहू की लगाओ लाली सुत्ती क्यों खप्पर वाली | माता थारी बेटी होण से दरिंदा बलात्कार करे , रोजाना तड़फती नारी अस्मिता सारू लाचार मरे , लो उठाई के खड़क ,मचल पड़ो माँ काली , सुत्ती क्यों खप्पर वाली | राजेश भंडारी "बाबू" १०४ महावीर नगर इंदौर ९००९५०२७३४

मालवी दिवस मनाओ

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 मालवी दिवस मनाओ  मालवी दिवस विगत दस वर्षो से हिन्दु नव संवत्सर के आरम्भ में गुड़ी पड़वा को मनाया जाता आ रहा है पुरे मालवा के दो करोड़ लोग मालवी दिवस को धूम धाम से मानते आ रहे है।  चूकि विक्रम संवत की गणना मालवा में ही शुरू हुई है इस लिए इस दिन को मालवी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी की जड़ भी मालवा की मीठी “मालवी” भाषा और बोली हे जो मालवा के करीब २ करोड़ लोगो द्वारा लिखी और बोली जाती हे | मालवा देश का मध्य प्रभाग होकर हिंदी को उन्नत और सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका में रहा हे | मालवी बोली मालवा का लोक जीवन हे और यहाँ के लोग इस भाषा बोली में जीते हे और घर घर में मालवी में बातचीत होती हे | मातृभाषा वह भाषा /बोली होती हे जो माँ की गोद में माँ के द्वारा सिखाई जाती हे और ये शास्वत सत्य हे की मातृभाषा ही आदमी को अपनी मातृभूमि और माँ से जोड़ती हे और भाषा ही होती हे जो लोगो को लोगो से जोड़ती हे लोगो से समाज और समाज से गाव और गाव से शहर और शहर से प्रदेश और देश को जोड़ती हे लेकिन यदि भाषा का सम्मान नहीं किया जाता तो भाषा की दीवार भी खड़ी हो जाती हे इस दीवार के कारण ही तो किसान आन्...